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बिहार चुनाव विधानसभा चुनाव 2020: कोसी, सीमांचल और पूर्व बिहार की राजनीति- गंगा के कछार और कोसी की धार के साथ बहती है…

कोसी, सीमांचल और पूर्व बिहार की राजनीति- गंगा के कछार और कोसी की धार के साथ बहती है...

गंगा के किनारे बसा हुआ शहर मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार, भागलपुर का गोपालपुर और बिहपुर विधानसभा क्षेत्र गंगा और कोसी के दोआब में बसे हैं। वहीं सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार और उससे सटे जिले कोसी की धार से प्रभावित हैं। दोनों नदियां इस क्षेत्र की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर भी हैं।गंगा के कछार और कोसी की धार से प्रभावित पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल का इलाका प्रदेश में सत्ता की राह तय करता रहा है। गंगा और कोसी की तरह ही इस इलाके की राजनीति का बहाव भी दिशाएं बदलता रहा है। इन इलाकों की पहचान गंगा और कोसी के वरदान व अभिशाप दोनों से जुड़ी है। वैसे ही, यहां के मतदाता कभी दलों को बिहार की सत्ता की चाबी सौंपते हैं तो कभी सत्ता से दूर करते हैं।

डॉ. रामजी सिंह, पूर्व सांसद, भागलपुर के अनुसार गंगा और कोसी के आसपास के इलाकों में विकास की जरूरत है। यहां दोनों नदियों का मिलान है। पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल का इलाका मिला हुआ है। विकास नहीं होने पर परिवर्तन की हवा चलती है। इस हवा से राजनीतिक दल अछूते नहीं रहते। वही डॉ. रमन कुमार, प्राचार्य, एसएम कॉलेज, भागलपुर के अनुसार कोसी अपनी धारा बदलती रहती है। क्षेत्र की जनता भी काफी जागरूक है। मतदाता विचारों के साथ नेताओं को बदलते रहते हैं। गंगा किनारे सभ्यता का विकास हुआ, लेकिन अंग क्षेत्र का विकास नहीं हुआ। यही कारण है कि राजनीति के क्षेत्र में बदलाव का प्रयोग होते रहता है।

पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल का भौगोलिक और जातीय समीकरण अन्य क्षेत्रों से अलग है। कृषि प्रधान इलाका होने के अलावा इस क्षेत्र की सीमाएं नेपाल, असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड से जुड़ी हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका असर भी देखने को मिलता है। जातीय समीकरण देखें तो किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में अल्पसंख्यकों की आबादी अधिक है। कहावत है कि ‘रोम पोप का तो मधेपुरा गोप का’। महागठबंधन के लिए इस क्षेत्र का चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

देश और बिहार की राजनीति में क्षेत्र के नेताओं का अहम योगदान रहा है। यहां के कई नेता बिहार के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री और सूबे में मंत्री रहे हैं या वर्तमान में हैं। इनमें स्व. भागवत झा आजाद, बीपी मंडल, भोला पासवान शास्त्री, चन्द्रशेखर सिंह, शिवचन्द्र झा, सदानंद सिंह, शरद यादव, विजेन्द्र प्रसाद यादव, शकुनी चौधरी, तसलीमुद्दीन, तारिक अनवर जैसे कई नेता शामिल हैं। मधेपुरा लोकसभा सीट से ही एक बार लालू प्रसाद यादव ने भी जीत दर्ज की थी। हालांकि दो जगह से जीतने के चलते बाद में यहां से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में पप्पू यादव ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।

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