बिहार चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 : राजनीतिक दल जुटे चुनावी मौसम में बाहर रहने वाले प्रवासी वोटरों को लुभाने में

राजनीतिक दल जुटे चुनावी मौसम में बाहर रहने वाले प्रवासी वोटरों को लुभाने में

बिहार विधानसभा के चुनावी मौसम में जुटे राजनैतिक दलों वोटरों को साधने के अलावा अपनी नजर प्रवासी बिहारियों पर जमाये हुए है। असल में राज्य से बाहर रहने वाले इन बिहारियों की चुनावी भूमिका बड़ी खास है। यह कई मायने में चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। बाहर स्थापित हो चुके बिहारियों की अपने गांव-जवार में साख है। उनमें से तमाम लोग ओपिनियन मेकर की भूमिका भी निभा सकते हैं।

संख्या की दृष्टि से भी प्रवासी बिहारियों का आंकड़ा कुल मतदाताओं का सात से आठ प्रतिशत है। इनको साधने की जुगत में दल और प्रत्याशी बिहार फाउंडेशन के विभिन्न चैप्टरों के पदाधिकारियों से भी संपर्क साध रहे हैं। देश का शायद ही कोई हिस्सा हो, जहां बिहारी न हों। दुनिया के तमाम देशों में भी इन्होंने अपनी मेहनत और दिमाग का लोहा मनवाया है। इनमें ब्यूरोक्रेट, व्यवसायी से लेकर कामगार और श्रमिक शामिल हैं। अब दल इनकी चुनावी भूमिका का गणित साधने में जुट गए हैं।

वर्ष 2011 में हुई जनगणना के आंकड़ों को देखें तो प्रवासी बिहारियों की संख्या करीब 39 लाख थी। एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल यह संख्या तकरीबन 55 लाख है। विधानसभा चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या सात करोड़ 79 लाख के करीब है। ऐसे में प्रवासियों की संख्या कुल वोटरों की तकरीबन सात प्रतिशत हो गई। यह वो आंकड़ा है, जो किसी दल या प्रत्याशी का गणित बना या बिगाड़ सकता है।

कोरोना काल में देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान लाखों की संख्या में प्रवासी बिहारी कामगार बिहार लौट आए थे। जैसे-जैसे देश के विभिन्न हिस्सों में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई, इनमें से तमाम अपने काम पर लौट गए हैं। अब भी काफी संख्या में लोग यही हैं।

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