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चार दशकों से यादव ही यहाँ के विधायक है, जानिए इस बार कौन हो सकता उम्मीदवार

चार दशकों से यादव ही यहाँ के विधायक है, जानिए इस बार कौन हो सकता उम्मीदवार

उत्तर बिहार के कई ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां बड़ी पार्टियों के लिए एक ही जाति के उम्मीदवार को उतारने की मजबूरी है। मुजफ्फरपुर की औराई, समस्तीपुर की हसनपुर व वैशाली की राघोपुर सीटें ऐसी ही हैं। यहां पिछले चार दशकों से यादव ही विधायक बनते रहे हैं। इस बार भी दोनों बड़े गठबंधनों से इसी जाति के उम्मीदवार को यहां से उतारने की संभावना है। यहां तक कि तेज प्रताप इस बार महुआ की जगह हसनपुर से उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

मुजफ्फरपुर व सीतामढ़ी जिले की सीमावर्ती सीट औराई नदियों से घिरी है। 1977 के बाद से यहां सिर्फ यादव उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। गणेश कुमार राय ने लगातार सात बार यहां का प्रतिनिधित्व किया है। फरवरी 2005 के चुनाव में जदयू के अर्जुन राय ने उनके विजयी रथ को रोक दिया था। उसी वर्ष अक्टूबर के चुनाव में अर्जुन राय ही विजयी रहे। इसके बाद के तीन चुनाव में यहां दो यादवों राजद के डॉ. सुरेंद्र कुमार व भाजपा के रामसूरत राय में टक्कर हुई थी। दो बार डॉ. कुमार व एक बार रामसूरत जीते।

समस्तीपुर जिले की हसनपुर विधानसभा सीट पर 1967 से आम चुनाव हो रहे हैं। तबसे पिछले चुनाव तक यहां से यादव ही विजयी रहे हैं। पहले से लेकर कई चुनाव तक गजेंद्र प्रसाद हिमांशु के अलावा दूसरे नाम को जनता ने तवज्जो नहीं दी। पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से विजयी हुए थे। अगला दो चुनाव भी इसी पार्टी से जीते। 1977 व 1980 में जनता पार्टी से जीते। पहली बार उन्हेंं 1985 में हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद यादव ने मात दी थी। मगर, अगले ही चुनाव में उन्होंने फिर बड़े अंतर से जीत दर्ज कर वापसी की थी। 1995 में टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरे थे। मगर, प्रदर्शन कमजोर रहा। जनता दल से सुनील कुमार पुष्पम विजयी हुए थे। वर्ष 2000 के चुनाव में जदयू के सहारे गजेंद्र फिर विधानसभा पहुंचे थे। यह उनकी सातवीं व अंतिम जीत थी। इसके बाद के चार चुनाव में लगातार दो बार राजद से सुनील कुमार पुष्पम व दो बार जदयू के राज कुमार राय जीते।

तिरहुत प्रमंडल के वैशाली जिले की राघोपुर सीट ने राज्य को दो-दो मुख्यमंत्री व एक उप मुख्यमंत्री दिए हैं। यादव बहुल यह सीट अब लालू परिवार की पारंपरिक सीट हो गई है। हालांकि, एक बार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हार का सामना करना पड़ा था। 2010 के आम चुनाव में जदयू के सतीश कुमार ने उन्हेंं पराजित किया था। इस चुनाव को छोड़ दें तो 1995 से इस सीट पर लालू व उनके परिवार के लोगों का कब्जा है। पिछले चुनाव में तेजस्वी प्रसाद सर्वाधिक वोट लेकर विजयी रहे थे। 1980 से इस सीट पर यादवों की जीत का सिलसिला शुरू हुआ था। जनता पार्टी सेक्युलर के उदय नारायण राय ने कांग्रेस उम्मीदवार को पराजित किया था। 1985 व 1990 में भी वे विजयी हुए थे। इसके बाद लगातार दो-दो बार लालू प्रसाद व राबड़ी देवी ने जीत दर्ज की थी। जबकि शुरुआती चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा था।

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