बिहार विधानसभा चुनाव 2020: 25 साल से पटना साहिब से MLA हैं नंदकिशोर यादव, बहुत आये गए पर इनका कोई बाल भी बांका न कर सका…

शायद ही कोई होगा जो इतने लम्बे समय से लगातार जीतता आया हो पर इन्होने न सिर्फ ढाई दशक से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का भगवा झंडा लहराया हुआ है, बल्कि अपनी छवि भी साफ-शूटरी ईमानदार नेता कि बना रखी है। जी यहाँ बात हो रही है नंदकिशोर यादव कि, यादव बिहार की राजधानी पटना के पूर्वी हिस्से वाली विधानसभा सीट यानी पटना साहिब सीट पर ढाई दशक से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का भगवा झंडा ही लहराते रहे है।

1995 में नंदकिशोर यादव यहाँ से पहली बार जीतकर विधान सभा पहुंचे। उसके बाद आज तक इस सीट पर कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं जीत सका। यादव बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। हालांकि, 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जब लालू यादव और नीतीश कुमार ने गठजोड़ कर महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था, तब भी नंदकिशोर यादव यहां से अपनी गाड़ी खींचने में कामयाब रहे। उन्होंने बहुत ही कम मतों के अंतर से राजद के संतोष मेहता को पटखनी दी थी। यादव को 88,108 वोट मिले थे जबकि मेहता को 85,316 वोट मिले थे। बीजेपी को कुल 46.89 फीसदी जबकि राजद को 45.40 फीसदी वोट मिले थे।

नंदकिशोर यादव को पार्टी और व्यक्तिगत दोनों छवि का फायदा मिलता रहा है। तभी तो वो लगातार छह बार ढाई दशक यानी 25 वर्षों से यहां से विधायक चुने जाते रहे हैं। यादव आरएसएस के कैडर रहे हैं। राज्य में एनडीए की सरकार में लगातार मंत्री रहे हैं। उन्होंने पटना नगर निगम में पार्षद के चुनाव से चुनावी राजनीति की शुरुआत की थी। बाद में वो पटना के डिप्टी मेयर भी रहे। 1995 में पहली बार पटना पूर्वी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

इस सीट पर वैश्य, कोयरी-कुर्मी और यादव मतदाताओं की बहुलता है। मुस्लिमों की भी अच्छी आबादी है।राज्य के पथ निर्माण मंत्री होने के बावजूद नंदकिशोर यादव के चुनावी इलाके में जल जमाव और सड़क जाम आम समस्या है। पिछले साल पटना में हुए जल जमाव में इनके इलाके में लोगों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी थी। यह सीट पूरी तरह से शहरी सीट है। जहां कारोबारियों की संख्या अधिक है। इनके इलाके में ही प्रसिद्ध पटनासाहिब गुरुद्वारा है।

शायद ही कोई होगा जो इतने लम्बे समय से लगातार जीतता आया हो पर इन्होने न सिर्फ ढाई दशक से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का भगवा झंडा लहराया हुआ है, बल्कि अपनी छवि भी साफ-शूटरी ईमानदार नेता कि बना रखी है। जी यहाँ बात हो रही है नंदकिशोर यादव कि, यादव बिहार की राजधानी पटना के पूर्वी हिस्से वाली विधानसभा सीट यानी पटना साहिब सीट पर ढाई दशक से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का भगवा झंडा ही लहराते रहे है।

1995 में नंदकिशोर यादव यहाँ से पहली बार जीतकर विधान सभा पहुंचे। उसके बाद आज तक इस सीट पर कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं जीत सका। यादव बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। हालांकि, 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जब लालू यादव और नीतीश कुमार ने गठजोड़ कर महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था, तब भी नंदकिशोर यादव यहां से अपनी गाड़ी खींचने में कामयाब रहे। उन्होंने बहुत ही कम मतों के अंतर से राजद के संतोष मेहता को पटखनी दी थी। यादव को 88,108 वोट मिले थे जबकि मेहता को 85,316 वोट मिले थे। बीजेपी को कुल 46.89 फीसदी जबकि राजद को 45.40 फीसदी वोट मिले थे।

नंदकिशोर यादव को पार्टी और व्यक्तिगत दोनों छवि का फायदा मिलता रहा है। तभी तो वो लगातार छह बार ढाई दशक यानी 25 वर्षों से यहां से विधायक चुने जाते रहे हैं। यादव आरएसएस के कैडर रहे हैं। राज्य में एनडीए की सरकार में लगातार मंत्री रहे हैं। उन्होंने पटना नगर निगम में पार्षद के चुनाव से चुनावी राजनीति की शुरुआत की थी। बाद में वो पटना के डिप्टी मेयर भी रहे। 1995 में पहली बार पटना पूर्वी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

इस सीट पर वैश्य, कोयरी-कुर्मी और यादव मतदाताओं की बहुलता है। मुस्लिमों की भी अच्छी आबादी है।राज्य के पथ निर्माण मंत्री होने के बावजूद नंदकिशोर यादव के चुनावी इलाके में जल जमाव और सड़क जाम आम समस्या है। पिछले साल पटना में हुए जल जमाव में इनके इलाके में लोगों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी थी। यह सीट पूरी तरह से शहरी सीट है। जहां कारोबारियों की संख्या अधिक है। इनके इलाके में ही प्रसिद्ध पटनासाहिब गुरुद्वारा है।

Laxmi Chaurasia

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